एक गर्भवती माँ की अस्पताल बैग: क्यों? कब? कैसे?

एक गर्भवती माँ के लिए अपना अस्पताल का बैग पैक करना आवश्यक ही नही बल्की एक भावनात्मक लगाव है। हर माँ अपने बच्चे के लिए सबसे बेहतरीन चीज़ें देना चाहती है और इसका प्रभाव सबसे ज्यादा अस्पताल बैग में देखा जाता है।
पर ऐसा अक्सर देखा गया है कि उसमें से आधी चीज़ें भी उपयोग में नही आती। इससे भी बड़ी चुनौती ये है कि भारतीय संस्कृति में बच्चे के जन्म से पहले उसके लिए किसी भी प्रकार की खरीदारी नही करते। इसीलिए हम अपना ध्यान केंद्रित करेंगे माँ के बैग पर।
  • क्यों चाहिए एक माँ को ये अस्पताल की बैग : आज कल हर अस्पताल में सब कुछ मिलता है पर हर औरत के लिए उनकी व्यक्तिगत चीज़ें ज़्यादा महत्वपूर्ण होती है। जैसे की कपड़े, चप्पलें, तौलिया इत्यादि। ये चीज़ो से एक औरत खुश महसूस करती है
  • ये बैग कब पैक करे? नौंवा महीना शुरू होते ही बैग भर के तैयार रखनी चाहिए, इससे ये होगा कि अगर अचानक डिलीवरी के लिए जाना पड़ा तो ये ना सोचना पड़े कि क्या क्या ले कर जाए। इतनी जल्दी पैक करना का फायदा ये भी होगा कि आपके पास बहुत समय रहेगा कि आप बैग को खोल कर वापस से अपनी आवश्यकता के हिसाब से वापस से पैक कर पाएंगी।  इसी बात पर एक और सवाल ये उठता है कि आप ब्रेस्टफीडिंग(स्तनपान) संबंधित कपड़े कब ख़रीदे। डॉक्टरों का कहना है कि सातवें महीने में एक गर्भवती महिला का शरीर जैसा होता है, डिलीवरी के बाद वैसा लगता हैं। इसीलिए सातवें महीने में लिए हुए कपड़े की फिटिंग सर्वोत्तम होती है।
  • पैक कैसे करें:  डिलीवरी के बाद २-३ दिन तक एक माँ दौड़ भाग नही कर सकती और ऐसे में किसी को समझना बहुत कठिन हो जाता है कि कौन सी चीज कहाँ रखी नही है। इसीलिए जब आप अपना बैग पैक करे तो परिवार के किसी सदस्य को समझा दीजिये कि कौन सा समान कहाँ रखा है। या तो फिर किसी और से पैकिंग करवाइये तो उन्हें ध्यान रहेगा कि उन्होंने समान कहाँ रखा है।
क्या आपने अपना बैग पैक किया था? आपने क्या और कैसे पैक किया था?
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